A thought which is best create in my mind wherever i had seen something in my life or learned somehow in the books or took knowledge from others. its just my thought and my creativity for human being.
Sunday, January 29, 2012
ELECTION...???
आज का समाज जिसका कोई मोल नहीं है न ही कोई उप्देशिक सन्देश जिसके द्वारा हम अपने समाज में एक अच सन्देश दे सके की पहले हम इंसान है और मानव जीवन की प्रवितियाँ का प्रमुख कार्य जीवन को सुगम बनाना है.
आज चुनावी माहौल में सभी पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में कह रही है की, महिला उत्थान, समाज सुधार, शिक्षा का प्रसार, बालिका विद्यालय की स्थापना, वितीय सहायता साथ ही यांत्रिकी लैपटॉप मोबाइल साइकिल और बहुत कुछ अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है.
मैं व्यक्तिगत रूप से ये कहना चाहता हु कि आखिर कब तक एक आडम्बर रूपी रक्ष्षा व्यक्ति एक आम आदमी कि भावनाओ के साथ खिलवाड़ करता रहेगा और अपने बड़े बड़े घर और समाज के ठेकेदार के रूप में अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए सभी प्रकार के दंड भेद अपनाते रहेगा!
आज सभी को एक ऐसे व्यक्ति कि तलाश है जो बीना भाषण के अपने काम के प्रति समर्पित हो और समाज के हर तबके के लोगो को जरुरत के हिसाब से सुविधाए उपलब्ध कराये और एक सभ्य समाज कि स्थापना करे जैसे कि कुछ हिन्दुस्तानी आदर्श जिनको रियल हीरो का ख़िताब दिया जाए तो कोई गुरेज नहीं जिनमे प्रमुखता से ...
श्री जे ऍम लिंगदोह, श्री टी अन शेषण, श्री अन्ना हजारे, श्री नितीश कुमार, डॉ मनमोहन सिंह, और भी बहुत है जिनका नाम गर्व के साथ लिया जा सकता है की ये हमारे देश के रियल हीरो है जिन्होंने कुछ करने के लिए अपने को समर्पित कर दिया है.
आज वर्तमान में खुद को जागरूक करने की जरुरत है और सही गलत की पहचान करना जरुरी है.
प्रकाश
9999418599
Saturday, January 28, 2012
Indian Cricket
आज का क्रिकेट पहले से कितना आगे बढ़ गया है ! क्या हो गया है हिंदुस्तान को जो अपना सब छोड़ कर क्रिकेट के पीछे लग गया है, पहले हम मनोरंजन और खेल भावना के साथ खेल का आनंद उठाते थे और आज जहा पैसा है वह खेल को आगे बढ़ाते है, अगर सचिन तेंदुलकर शतक लगा दे तो विज्ञापन की दर दो गुनी हो जाती है और अगर बाई चुन भूटिया सन्यास लेते है तो किसी को कोई फ़िक्र नहीं होती है, क्या येही है खेल की दुनिया?
धोनी सचिन द्रविड़ लक्ष्मण गंभीर सहवाग ये क्या है इतने बड़े नाम और पुरे साल में कुछ नहीं, पर पैसा इतना दिया जाता है की आने वाली सात पीढ़िय भी बैठ कर खाए, वही दुसरे खेल में जो बड़ी बड़ी ट्राफी ले कर आये है उनको हवाई अड्डे में लेने भी कोई नहीं आया और इनाम के रूप में २५०००/- रुपये दिए जाते है जो देश का सबसे बड़ा शर्म है!
आओ देश को अछा बनाये और खेल में खेल भावना को और ऊँचा उठाये ताकि पैसा किसी खेल में बाधक न बने और न सिर्फ क्रिकेट बल्कि फूटबाल hockey में भी देश का झंडा बुलंद हो सके.
प्रकाश गुप्ता
Subscribe to:
Posts (Atom)