एक लड़की दिल्ली में जिसका बलात्कार किया और मार कर फैक दिया क्या ये ही हमारा समाज है और हमारी समझ है समाज कि जहा हम रहते है !
बड़े अफ़सोस कि बात है कि आज हम जिस समाज में रहते है वह कुछ ऐसे वहसी और दरिंदे रहते है जिनके कारण आज पूरा समाज कलंकित हो रहा है और जो पुरे समाज को शर्मसार कर रहा है, पर क्या दरिंदे इसके लिए जिम्मेदार है?
मेरी समझ ये कहती है कि ये हम सभी कि जवाबदारी है कि एक सभ्य समाज का निर्माण हमको स्वयं करना है जहा शिक्षा और रोजगार ऐसे हथियार है कि उसके द्वारा हम एक अछे समाज का निर्माण कर सकते है !
शिक्षा से हम अछा और बुरा का अंतर हर वर्ग तक पंहुचा सकते है जहा हर वयक्ति अपनी स्वतंत्रतता कि पहचान स्वयं कर सकता है और अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकता है. विगत वर्ष जब सुबह का अख़बार पढ़ा तो पता चला कि निर्भया नामक एक लड़की का बलात्कार हुआ है जिसको आधी बलात्कार के बाद कड़कढाती ठण्ड में रोड में फैक दिया गया और जिसकी मृत्यु कुछ दिनों के बाद हॉस्पिटल में हो गयी!
बड़े ही शर्म कि बात है कि आज ऐसा होता है जहा हम अपने आप को इक्कीसवी सदी का भारत बताते है जहा सब कुछ है पर एक सभ्य समाज नहीं है !!
बड़े अफ़सोस कि बात है कि आज हम जिस समाज में रहते है वह कुछ ऐसे वहसी और दरिंदे रहते है जिनके कारण आज पूरा समाज कलंकित हो रहा है और जो पुरे समाज को शर्मसार कर रहा है, पर क्या दरिंदे इसके लिए जिम्मेदार है?
मेरी समझ ये कहती है कि ये हम सभी कि जवाबदारी है कि एक सभ्य समाज का निर्माण हमको स्वयं करना है जहा शिक्षा और रोजगार ऐसे हथियार है कि उसके द्वारा हम एक अछे समाज का निर्माण कर सकते है !
शिक्षा से हम अछा और बुरा का अंतर हर वर्ग तक पंहुचा सकते है जहा हर वयक्ति अपनी स्वतंत्रतता कि पहचान स्वयं कर सकता है और अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकता है. विगत वर्ष जब सुबह का अख़बार पढ़ा तो पता चला कि निर्भया नामक एक लड़की का बलात्कार हुआ है जिसको आधी बलात्कार के बाद कड़कढाती ठण्ड में रोड में फैक दिया गया और जिसकी मृत्यु कुछ दिनों के बाद हॉस्पिटल में हो गयी!
बड़े ही शर्म कि बात है कि आज ऐसा होता है जहा हम अपने आप को इक्कीसवी सदी का भारत बताते है जहा सब कुछ है पर एक सभ्य समाज नहीं है !!
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